बुधवार, 26 दिसंबर 2012

कारगिल की घाटी : 3


‘‘चुप! खामोश।’’ अनन्या पूरी ताकत से चीखी। इतने में कक्षा का दरवाजा खुला और मेडम कमलेश भीतर प्रवेश करती हुई अपनी नाराजगी जताने लगी- ‘‘अनन्या मोनीटर होकर तुम्हारा इस तरह चीखना शोभा नहीं देता। जब अकेली इतना चिल्लाओगी तो क्लास को किस तरह चुप रखोगी? लगता है तुममें अच्छे मोनीटर के गुण नहीं...तुम ट्रूप कैसे संभालोगी? दरअसल तुमहारी पूरी क्लास भी इस काबिल नहीं कि उसे किसी आयोजन के लिए भेजा जा सके। तुम सबकी यही सजा है कि इस बार तुम्हें इस परेड से वंचित रखा जाय। सूची से चुने गये सब नाम काट दिए जाए।
मेडम....
अनन्या कुछ बोलने को हुई तो मेडम ने उसे झिड़क दिया। बहुत हो गया मैं कुछ नहीं सुनने वाली। एक खाली पिरीयड तुम नहीं संभाल सकती। मैंने अपनी आंखों से सब देख लिया है। मैं तो यही रिपोर्ट करूंगी। चलो लड़कियों अपनी काॅपी निकालो। आज हम 10 वीं प्रश्नावली हल करेंगे। सबसे पहले मैं सरल ब्याज का सवाल लिखाती हूं। सब लिखो। मेडम ने लिखवाना शुरू किया। अनन्या बुझे मन से सवाल लिखने लगी। अनन्या क्या पूरी कक्षा की लड़कियों के चेहरे बुझे हुए थे। जो कक्षा अभी मस्ती में डूबी हुई थी वहां का वातावरण बोझिल हो गया।
पिरीयड के खत्म होते ही दीप्ति ने अनन्या से माफी मांगी- ‘‘साॅरी अनन्या....’’
‘‘अब साॅरी कहने से क्या फायदा? हमारी क्लास का नाम तो कट ही गया ना....।’’ अनन्या की आंसू भरी आंखे यहीं बोल रही थी। दीप्ति अनन्या से लिपट गई। 
‘‘हमंे माफ कर दो अनन्या... कहते हुए लड़कियों ने अनन्या को घेर लिया। रूंआसी अनन्या के मुंह से केवल इतना ही फूटा- ‘‘हमें सजा तो मिल ही चुकी है। अब पछताने से क्या फायदा?

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

कारगिल की घाटी : 2



‘‘अरे ये क्या धक्का मुक्की हो रही है?’’ कोई कपड़े खींच रही थी तो कोई बाल नौंच रही थी। अनन्या उन्हें छुड़ाने की कोशिश करने लगी- ‘‘दीप्ति ये क्या तरीका है?’’
‘‘मैंने नहीं मारा धक्का... धक्का पीछे से आया था...वो पीछे बानो की बच्ची...तुझे तो अभी देखती हूं....’’. कहती हुई वह झपटने वाली थी कि दो तीन लड़कियों ने उसे पकड़ कर रोक लिया। लड़ो मत...लड़ो मत....चलो लड़ाई लड़ाई माफ करो, गांधीजी को याद करो।
‘‘उफ् तुम लोग तो किसी ट्रूप में जाने के काबिल हो नहीं। अभी मेडम से सबकी शिकायत करती हूं। कहती हुई मोनीटर ने पेन निकाल लिया और नाम लिखने लगी। लड़ती झगती लड़कियां लड़ना छोड़ अनन्या को घेर लिया।
‘‘ओ अनन्या क्या करती हो...प्लीज मेरा नाम मत लिखना...ट्रूप से मेरा नाम नहीं कटना चाहिये....
‘‘मेरा नाम तूने सबसे पहले लिख दिया।’’ दीप्ति चिल्लाई। ‘‘काटो अभी का अभी। नहीं तो....’’ दीप्ति ने दांत भींच लिये।
‘‘नहीं तो क्या? डराती है? जाओ सब पहले अपनी अपनी जगह बैठो। जो चुपचाप बैठ जायेगा उसका नाम थोड़ी देर में कट जायेगा।’’ अनन्या का कहा मान सब लड़कियां अपनी अपनी जगह बैठ गई। दीप्ति मुंह बना रही थी। उसकी ठोडी में सलमा का दांत गड़ा था। वह अभी भी अपनी दाढ़ी सहला रही थी। बोली- ‘‘शकीला, बानो और गुरमीत का नाम लिखो। सारे फसाद की जड़ यही है।’’
‘‘हमारा क्यों? सबसे पहले अपना नाम लिखवा।’’
‘‘चुप करो। मुझे क्या लिखना है और क्या नहीं ये मैं जानती हूं। कोई भी एक शब्द नहीं बोलेगा।’’ अनन्या के कहने पर दीप्ति ने मुंह बनाते हुए फुसफुसाया, ‘बड़ी आई मोनीटरनी! हूउं!
तभी कक्षा की एक लड़की ने चाॅक उठा कर पीछे बैठी लड़की पर मार दी। लड़की झुककर मार बचा गई। चाॅक दीवार से जा टकराई। पास बैठी लड़की ने चाॅक उठाई और उसी दिशा में जोर से फैंक मारी जहां से चाॅक आयी थी। ‘‘तुम अगाड़ी वाले पीछाड़ी वालो को क्यों मार रहे हो? लो अब तुम खाओ।’’ अब तो चाॅक से मारा मारी का खेल शुरू हो गया। लड़कियां एक दूसरे को चाॅक से मारने लगी। इस बीच अनन्या उठी और कक्षा से बाहर निकल गई। किसी एक ने कहा, ‘‘अनन्या मेडम के पास शिकायत करने गई है।’’
‘‘मेरा नाम तो नहीं लिखा था उसने? ..... तेरा नाम लिखते देखा था मैंने.....क्या अब मुझे दल में शामिल नहीं किया जायेगा?...अब सब चुपचाप बैठो।’’ कक्षा की लड़कियां फिर मौन होकर बैठ गई। दो मिनिट बाद अनन्या लौट आयी। खामोश बैठी लड़कियों से बोली- ‘‘परेड लीडर का नाम चुन लिया गया है।’’
‘‘कौन है?...बताओ तो जरा....’’ सभी फिर से चिल्ला उठी।
‘‘मुझे पता है पर मैं नहीं बताऊंगी। मेडम ही आकर बतायेगी। इतने में एक कागज का बना हवाई जहाज पीछे से उड़ता हुआ आया और अनन्या की टेबिल पर आ गिरा। उसने हवाई जहाज को उठाया। इस पर अनन्या का कार्टून बना हुआ था। बिखरे बालों के साथ बड़े बड़े दांत बाहर निकले हुए चेहरे के नीचे लिखा था कक्षा की मोनीटर- राक्षसनी। अनन्या ने पीछे घूमकर देखा। सब लड़कियां मुंह पर हाथ रखे मंद-मंद मुस्कुरा रही थी। अनन्या को गुस्सा आ गया- ‘‘अब तो जरूरसे सबकी शिकायत करूंगी। ये हवाई जहाज भी मेडम को दिखाऊंगी।’’
‘‘मेडम को अपना ये कार्टून बताओगी अनन्या.....?’’
‘‘चुप! खामोश।’’ अनन्या पूरी ताकत से चीखी। इतने में कक्षा का दरवाजा खुला और मेडम कमलेश भीतर प्रवेश करती हुई अपनी नाराजगी जताने लगी-

सोमवार, 17 दिसंबर 2012

कारगिल की घाटी : 1

‘‘प्लीज शान्त हो जाओ एक और अच्छी खबर है मेरे पास।’’
‘‘क्या.....? क्या....?’’
‘‘हमारी कक्षा को परेड प्रदर्शन के बाद गीत गाने का मौका मिलेगा। उसकी सभी को तैयारी करनी होगी।’’
‘‘अजी कमाल हो गया .... मोनीटरजी इस बार तो तूसी रिपोर्ट बड़ी जानदार है।’’ जसविन्दर जोर से चिल्लाई तो हरप्रीत ने मुंह में अंगुली डाल जोर से सीटी बजा दी। ‘‘कौन सा गीत है मोनीटरजी? हम भी तो सुने।’’
‘‘बताती हूं।’’ कहती हुई अनन्या क्लासरूम के मंच पर चढ़ गई। मेडम की खाली टेबुल कुर्सी के पास जाकर खड़ी हो गई ओर फिर कहने लगी- किस किस को याद है सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्ता हमारा.....।’’
अनन्या के इतना कहने भर की देर थी। कई लड़किया हाथ उठाए मंच की ओर दौड़ पड़ी- हमें आता है.....हमें पूरा याद है....
एक एककर लड़कियों का पूरा झुंड कक्षा मंच पर पहुंच गया। सभी गाने लगी-
सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्ता हमारा, हमारा
हम बुलबुले है इसके ये गुलसिता हमारा...हमारा...
‘‘प्लीज लड़कियों इतना बेसुरा मत गाओ कि गीत ही शर्मा जाय।’’ अनन्या कान के पर्दे बंद करती हुई चीखी। पर उसकी बात कोई नहीं सुन रहा था। पूरी कक्षा में गीत के शब्द बेसुरे होकर शोर पैदा करने लगे-
पर्वत वो सबसे ऊंचा.....गोदी में खेलती है जिसके हजारों नदिया....हिन्दी है हम वतन है हिन्दुस्ता हमारा...सारे जहां से अच्छा... शोर बढ़ने लगा तो अनन्या ने बढ़कर कक्षा के दरवाजे खिड़की बन्द करने लगी। ताकि शोर बाहर न जाय। उसका कक्षा को संभालना मुश्किल होता जा रहा था। लगभग दस मिनिट तक यही सब शोर शराबा चलता रहा। इसके बाद दीप्ति के पांव पर किसी का पैर लग गया। उई मां! दीप्ति चीख उठी- बदतमीज कहीं की....। उसने एक तमाचा शकीला के मुंह पर जड़ दिया। यह देख बानो ने दीप्ति को धक्का दे दिया। दीप्ति पीछे की लड़कियो से जा टकराई। किसी के सिर की ठोडी ठुकी तो किसी के होठ दांत में घुस गये।
‘‘अरे ये क्या धक्का मुक्की हो रही है?’’

कारगिल की घाटी : 15 अगस्त 2012







                       खाली पीरियड


‘‘ओऐं लड़कियों ऽ ऽ सब चुप हो जाओ....क्लास गल्र्स.....प्लीज.....शट योर माऊथ...’’कक्षा की मोनीटर अनन्या ने दरवाजे के भीतर घुसते हुए कहा। अनन्या की आवाज सुन खुसुर-पुसर करती, बतियाती, शोर करती सब लड़किया शान्त हो गई।
अनन्या अभी स्टाॅफरूम से लौटी थी। वह अध्यापिका का संदेश देने लगी-
‘‘सब सुनो, आज कमलेश मेडम क्लास नहीं लेगी.....स्टाॅफरूम में 15 अगस्त की तैयारी को लेकर मंत्रणा चल रही है। इस बार हमारे विद्यालय को स्टेडियम परेड के  दौरान अग्रिम पंक्ति में रहने का मौका मिला है। सबसे पहले हमारे स्कूल का ट्रूप होगा हमारे स्कूल का झंडा लिए....’’
हिप .... हिप... हुर्रे..... सभी लड़किया एक साथ उछल पड़ी।
‘‘सुनो सुनो ऽ’’ ताली बजाती मोनीटर ने मुंह पर अंगुली रखकर सबको चुप रहने का संकेत किया।
‘‘सब चुप हो जाओ......संभावना है कि परेड ट्रूप का कमांडर भी हमारे विद्यालय से चुना जाय शायद इसीलिए.......’’
‘‘क्या कोई लड़की बनेगी ट्रूप कमांडर.....हुर्रे....’’ सभी लड़किया एक साथ उछल पड़ी। ‘‘सुनो....सुनो...सुनो......’’ताली बजाती हुई मोनीटर ने मुंह पर अंगुली रखकर सबको चुप होने का संकेत किया। ‘‘सब चुप हो जाओ प्लीज...। परेड ट्रूप का कमांडर भी हमारे विद्यालय से चुना जाना तय है शायद इसीलिए.... ’’टेबिल थपथपाने की आवाज गूंजने लगी।
‘‘चयन के लिए सभी अध्यापिकाएं लड़कियों के नाम प्रस्तावित करके सूची बना रही है जो प्रधानाध्यापिकाजी को दी जायेगी। फिर वे किसी एक को चुनेगी।’’
‘‘वाह जी वाह! वाह....जी....वाह........कौन होगी वह मिस भाग्यशाली?.....हमारे स्कूल की ब्रांड एमबेसेडर?’’